तू रुकना नहीं
तू थकना नहीं
तू वह नहीं जो
एक आंधी से घबरा जाए
हवा मैं घुल बहते चला चल ऐ
ज़िन्दगी है गहरा सागर
डूबके है पार जाना
एक छोटी सी लहर से
फिर क्या है घबराना
मिलेंगे खूब जो तुझे
खिचेगे दो कदम पीछे
पर तू रुकना नहीं
आँखों मैं है सपने
करने है वह पूरे
तू थकना नहीं
तू रुकना नहीं
तू थकना नहीं
तू वह नहीं जो
एक आंधी से घबरा जाए
हवा मैं घुल बहते चला चल ऐ
ज़िन्दगी है गहरा सागर
डूबके है पार जाना
एक छोटी सी लहर से
फिर क्या है घबराना
मिलेंगे खूब जो तुझे
खिचेगे दो कदम पीछे
पर तू रुकना नहीं
आँखों मैं है सपने
करने है वह पूरे
तू थकना नहीं
तू रुकना नहीं